कोरोना के बाद की दुनिया में जॉब इंटरव्यू
कोविड-19 की वजह से लगाए गए 2 महीनों के लॉकडाउन के बाद अब जब अनलॉकिंग का पहला चरण लागू किया जा चुका है, फिर भी स्कूल और कॉलेज बंद ही हैं। अलग-अलग अनुमान लगाए जा रहे हैं कि कब स्कूल कॉलेज खुल जाएंगे। जैसा कि अक्सर किसी भी मुक्त समाज में होता है, इस विषय पर लोगों की राय विभाजित है! कुछ लोग मानते हैं के बच्चे काफी समय से घरों में बंद है, ऑनलाइन पढ़ाई से तंग आ चुके हैं, उन्हें अपने शिक्षकों की बात समझ नहीं आ रही और वह स्वभाव से चिड़चिड़े हो चले हैं! इस वजह से वह चाहते हैं कि स्कूल खुल जाए। और ऐसे पेरेंट्स और गार्जियंस भी हैं जो कोरोना का टीका पाए जाने तक बच्चों को स्कूल किसी भी हालत में भेजना नहीं चाहते! सरकार की, स्कूल संचालकों की, शिक्षकों की और स्वयं विद्यार्थियों की राय भी एक तो नहीं ही होगी! यह आर्टिकल मैं इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि मैं खुद एक होटल मैनेजमेंट कॉलेज में सीनियर लेक्चरर हूं और मैंने एक यूट्यूब पर एक एजुकेशनल चैनल बना रखा है जहां पर मैं अपने विषय से संबंधित सिंपल वीडियो अपलोड करता रहता हूं। अभी लॉकडाउन के दौरान मेरे पास काफी फ्री समय था और मैंने ढेर सारे वीडियो हर सेमेस्टर के लिए, थ्योरी और प्रैक्टिकल के लिए, हिंदी में और इंग्लिश में बनाकर अपलोड किए। यह चैनल 2018 की गर्मियों से एक्टिव है और कुछ खास लोकप्रिय नहीं हुआ लेकिन मुझे इस बात की तसल्ली रहती है अगर कोई विद्यार्थी सीखने का इच्छुक होगा तो उसके पास कुछ तो साधन रहेगा ।
जब मैंने लॉकडाउन के दौरान अपने वीडियो यूट्यूब पर पोस्ट किए तो मुझे लगा कि अभी तो सारे बच्चे घर पर बंद होंगे और मेरे वीडियो खूब देखे जाएंगे! जल्दी गलतफहमी दूर हो गई क्योंकि यूट्यूब पर जिनका चैनल चलता है उनके पास डैशबोर्ड नाम की एक सुविधा उपलब्ध होती है जहां हम एक-एक वीडियो की परफॉर्मेंस को देख सकते हैं कि उसे कितने लोगों ने और कितनी देर तक देखा है। मेरे पास लगभग 300 बच्चों की जिम्मेदारी हर साल रहती है और हर बच्चे को मैं अपने चैनल के बारे में क्लास रूम में बार-बार बताता रहता हूं। उम्मीद रहती है की ज्यादा से ज्यादा लोग आएंगे, सब्सक्राइबर्स बढ़ेंगे, चैनल मोनेटाइज होगा और फिर यूट्यूब के द्वारा ढेर सारी कमाई होगी! मगर अभी तक तो न नौ मन तेल हुआ है और ना मैं नाच सका हूं! मेरे एक-आध वीडियो तो ऐसे भी हैं जिन पर एक भी व्यू नहीं है! फिर मैंने 2 दिन पहले एक छोटा सा वीडियो खुद की रिकॉर्डिंग का अपने यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया और स्टूडेंट से आग्रह किया कि वह रिक्वेस्ट करें कि उन्हें किस टॉपिक पर वीडियो की आवश्यकता है। या फिर अगर किसी को कहीं कोई डाउट या कंफ्यूजन हो रहा है तो वह भी सवाल कमेंट के द्वारा पूछ सकते हैं।
पहला रिक्वेस्ट आया के कोरोनावायरस की वजह से पूरे विश्व में जो आर्थिक मंदी आ चुकी है उस वजह से कॉलेज से निकलने वाले फ्रेश ग्रेजुएट विद्यार्थियों के लिए नौकरी की जबरदस्त कमी आ चुकी है और बच्चे इन हालात में इंटरव्यू के बारे में जानना चाह रहे हैं कि उनसे क्या पूछा जाएगा, और उन्हें उसका क्या जवाब देना चाहिए। यह आर्टिकल मैं उन्हीं बच्चों के लिए लिख रहा हूं।
इंटरव्यू हमेशा एक ही उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। इंटरव्यू लेने वाली कंपनी भावी उम्मीदवारों से आमने सामने की बातचीत के द्वारा, अलग-अलग प्रकार के टेस्ट के द्वारा, उनकी क्षमताओं को परखना चाहती है। इसी दौरान उम्मीदवार के सामने भी यह मौका रहता है कि वह अपनी होने वाली कंपनी की खूबियों और कमजोरियों को भाँप सके, कंपनी के वर्क कल्चर को समझ सके और यह जजमेंट कर सके उसकी इस कंपनी के साथ जमने वाली है या नहीं!
इंटरव्यू की प्रक्रिया को समझाने के लिए मैं दो सरल उदाहरण का प्रयोग करना चाहूंगा;
पहला, शादी का;
दूसरा, बाजार में खरीद बिक्री का
शादी का फैसला कितना कठिन होता है यह हम आज के आधुनिक वेस्टर्न पद्धति, जिसे लिव इन रिलेशनशिप के नाम से जाना जाता है, की सहायता से समझ सकते हैं। गलत जीवनसाथी चुनने का डर, साथ रहते हुए लड़ाई झगड़ों का डर, महंगी तलाक प्रक्रिया, संपत्ति और बच्चों का बंटवारा, सामाजिक स्टेटस आदि ना जाने कितनी ही चिंताएं होती हैं जिस वजह से लोग लिव इन रिलेशनशिप स्वीकार कर लेते हैं लेकिन शादी नहीं करते। लिव इन रिलेशनशिप में भी लिखित में एग्रीमेंट वगैरा बनाकर एक दूसरे से साइन करवा लेते हैं ताकि बाद में कोई कानूनी पचड़ा ना फंस जाए। ठीकवैसे ही अगर कोई कंपनी एक गलत कर्मचारी चुन ले तो न जाने कितनी ही विकट समस्याएं पैदा हो जाएंगी। और अगर कर्मचारी को नई कंपनी रास ना आए तो उसे फिर जिंदगी भर हर इंटरव्यू में यह सफाई देनी होगी कि उसने अपनी पहली नौकरी क्यों छोड़ी? कहने का मतलब के इंटरव्यू में सावधानी में ही समझदारी होती है!
इंटरव्यू अब हम समझने की कोशिश करेंगे कंपनी के नजरिए से!
कोई कंपनी शुरू की जाती है तो सबसे पहले काम का बंटवारा होता है। फिर इसी आधार पर अलग-अलग डिपार्टमेंट बनाए जाते हैं और उसके बाद इस डिपार्टमेंट में भी काम का फिर से बंटवारा होता है जिससे उस डिपार्टमेंट के अलग-अलग सेक्शंस बनते हैं। डिपार्टमेंट के सेक्शन में भी बहुत सारे कर्मचारी होते हैं और उन सभी के पास अलग-अलग प्रकार के काम होते हैं। इन काम को हम जॉब्स कहते हैं। हर जॉब की एनालिसिस होती है, यानी कि उनका विश्लेषण। इस विश्लेषण से कम से कम 4 चीजें निकल कर आती हैं।
पहला, जॉब डिस्क्रिप्शन, जिसके अंदर उस काम से संबंधित जिम्मेदारियां, दूसरे विभागों व कर्मचारियों से संबंध, बॉस और सुपरवाइजर का संबंध इत्यादि इंगित रहते हैं।
दूसरा, जॉब स्पेसिफिकेशन, यानी कि उस कार्य को करने की योग्यता से संबंधित सूचना, जैसे कि शैक्षणिक योग्यता, टेक्निकल कुशलता, पेशेवर अनुभव आदि लिखे होते हैं।
तीसरा, जॉब अथवा टास्क लिस्ट जिसमें उस जॉब पोजीशन से जुड़ी हुई सारे मुख्य कार्यों का ब्यौरा रहता है। जैसे ही, होटल के फ्रंट ऑफिस डिपार्टमेंट में अगर आप रिसेप्शनिस्ट के पद पर काम करेंगे तो आपको ग्राहक का चेकिंग इन, चेकिंग आउट, होटल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर जिसे हम पीएमएस कहते हैं, यह सब हैंडल करना आना चाहिए। यह कुछ उदाहरण हैं जॉब लिस्ट के।
और चौथी होती है, जॉब ब्रेकडाउन यानी कि किसी भी टास्क या कार्य को पूरा करने के लिए छोटे-छोटे क्रमिक स्टेप्स। जैसे चेकिंग इन की प्रक्रिया को पूरी करने के लिए 10 से 15 स्टेप्स पूरे करने होंगे। मसलन, अभिवादन करना, नाम पूछना, रिजर्वेशन रिकॉर्ड ढूंढना, निर्धारित फॉर्म में रजिस्ट्रेशन करवाना, पेमेंट की विधि कंफर्म करना, फोटो लेना, पहचान पत्र लेना, चाबी देना वगैरा-वगैरा।
किसी भी इंटरव्यू का सीधा संबंध ऐसी जॉब ब्रेकडाउन से होता है। सीधे शब्दों में अगर मैं कहूं तो कंपनी आपसे यह पूछती है कि आप उसके लिए क्या कर सकते हैं। कृपया ध्यान दें के यहां पर आपका ज्ञान नहीं चेक हो रहा! आपका हुनर, आपका स्किल और आपकी निपुणता का निर्धारण हो रहा है।
एक कंपनी किसी भी संभावित उम्मीदवार में तीन चीजें ढूंढती है; ज्ञान, कौशल और एटीट्यूड। इन तीनों में जो सबसे ज्यादा उपयोगी होती है कंपनी के लिए वह है आपका कौशल। अगर आप कंफ्यूज हो रहे हैं कि मैं क्या बक रहा हूं तो मैं थोड़ा सा विस्तार से इस पॉइंट को समझाता हूं। आप स्वयं भी एक ग्राहक है और अक्सर वस्तुएं व सेवाएं खरीदते रहते हैं । अगर आपको सामान ना मिले या फिर सेवा ना मिले तो क्या आप सिर्फ किसी के ज्ञान के लिए या उसके एटीट्यूड के लिए कुछ भुगतान करेंगे? बेशक नहीं। तो आप जब भी किसी इंटरव्यू में जाएं तो अपने आप से यह सवाल पूछे कि मैं जिस कंपनी में जिस पोस्ट के लिए अप्लाई करने जा रहा हूं उस पद के लिए मैं क्या क्या काम कुशलतापूर्वक कर सकता हूं।
अब दूसरा उदाहरण जो कि बाजार में खरीद बिक्री के बारे में था, उसकी तुलना इंटरव्यू की प्रक्रिया से करके सरल तरीके से समझते हैं। बाजार में एक बेचने वाला होता है और दूसरा खरीदने वाला। दोनों की अपनी-अपनी जरूरतें होती हैं, अपने अपने हालात होते हैं और अपनी अपनी औकात होती है। खरीदने वाला मोलतोल कर कर सामान को कम से कम कीमत में खरीदने का प्रयास करता है। बेचने वाला भी अपनी तरफ से पुरजोर कोशिश करता है कि उसे अपने सामान की अच्छी कीमत मिले। इस प्रक्रिया को इंग्लिश में बारगेनिंग कहते हैं और एक ऐसी कीमत पर भाव तय होता है जहां लेने वाले को लगता है कि वह फायदे में रहा और बेचने वाला भी कुछ ऐसा ही महसूस करता है। है ना कमाल की सिचुएशन।
जॉब इंटरव्यू भी एक ऐसी बारगेनिंग प्रक्रिया है जिसमें खरीदने वाला कंपनी का ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर होता है और बेचने वाला उम्मीदवार। उम्मीदवार अपनी क्षमता बेचता है और खरीदने वाला अपनी आवश्यकता के अनुसार हुनर, ज्ञान और विवेक खरीदता है।
किसी भी इंटरव्यू में अगर हम शादी वाला और मार्केट में खरीद बिक्री वाला उदाहरण याद रखेंगे तो हम इंटरव्यू हैंडल करना सीख जाएंगे। कंपनी गलत कर्मचारी चुनने की गलती नहीं कर सकती इसीलिए उम्मीदवार की तैयारी पूरी और पक्की होनी चाहिए। ज्यादा ध्यान अपने हुनर, कौशल और कार्यक्षमता को देना चाहिए। खरीद बिक्री वाला उदाहरण हमें यह याद दिलाने के लिए है खरीदने वाला कम से कम कीमत पर सामान खरीदना चाहता है और अगर आप जरा भी असावधान हुए तो आपको आपकी क्षमताओं का उचित मूल्य प्राप्त नहीं होगा।
इंटरव्यू में जाने से पहले कृपया इन चीजों पर जरूर ध्यान दें;
पहला, उस कंपनी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी इकट्ठा करें।उसकी वेबसाइट पर जाएं और ज्यादा से ज्यादा पढ़ने, समझने की कोशिश करें।
दूसरा, जिस जॉब के लिए आप अप्लाई करना चाहते हैं उसकी जॉब डिस्क्रिप्शन, जॉब स्पेसिफिकेशन, जॉब लिस्ट, और जॉब ब्रेकडाउन का बारीकी से विश्लेषण जरूर कर ले। यह सब चीजें आपको गूगल सर्च के द्वारा आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे।
तीसरा, अपना बायोडाटा इस प्रकार बनाएं कि आपका कार्य कौशल, ज्ञान एवं एटीट्यूड साफ-साफ प्रदर्शित करें कि आप इस जॉब के लिए सटीक चुनाव रहेंगे।
चौथा, इंटरव्यू से संबंधित एफ ए क्यू, यानी कि फ्रिक्वेंटली आस्क्ड क्वेश्चंस, हिंदी में इसका मतलब होता है अक्सर पूछे जाने वाले सवाल। उसका जवाब लिखकर बनाएं, संभव हो तो किसी एक्सपोर्ट से डिस्कस करें और फिर जवाब बोल कर देने की प्रैक्टिस करें ताकि इंटरव्यू के वक्त, प्रेशर होने के बावजूद आप एक संक्षेप परंतु संपूर्ण जवाब दे पाए।
उदाहरण के तौर पर,
आप हमारी कंपनी ज्वाइन करना क्यों चाहते हैं?
आपने यह प्रोफेशन क्यों चुना?
हम आपको क्यों चुने?
आप अपने आप को 5 साल के बाद कहां देखते हैं?
पांचवा, उन सारे टास्क की लिस्ट जरूर बनाएं जिन्हें आप कुशलतापूर्वक कर पाते हैं। उसकी ग्रेडिंग भी कर ले कि किस में आप शानदार काम कर सकते हैं, किस में साधारण और किस में आपको अभी और ट्रेनिंग और प्रैक्टिस की आवश्यकता है।
जब भी आपसे इंटरव्यू यह पूछे कि मैं आपको क्यों सेलेक्ट करूं तो आपका जवाब यही सारे टास्क्स होंगे जिन्हें आप अपनी कंपनी के लिए कुशलतापूर्वक कर पाएंगे। कृपया झूठ ना बोलें क्योंकि वह छुपने वाला नहीं। होटल मैनेजमेंट में फूड प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में सिलेक्शन हमेशा डेमो टेस्ट देने के बाद ही होता है और दूसरे फील्ड में भी तरीके हैं चेक करने के कि आप वाकई यह कार्य कर पाएंगे या सिर्फ आपका ज्ञान थियरि (theory ) तक सीमित है। मेरी आपसे रिक्वेस्ट है के इस आर्टिकल को संपूर्ण या सही समझने की गलती ना करें। यह मेरे विचार हैं जिन्हें मैं अपने उन विद्यार्थियों के साथ बांट रहा हूं जिन्हें मुझ पर विश्वास है। इंटरव्यू का प्रोसेस काफी कॉम्प्लिकेटेड होता है और उसमें किसी भी कैंडिडेट को काफी कुछ सीखने और समझने की आवश्यकता होती है। इसी ब्लॉग पर मेरा इंग्लिश में एक आर्टिकल है जिसमें मैंने विस्तार से इंटरव्यू के बारे में बताया हुआ है। यहीं पर मैं उसका लिंक दे रहा हूं। अगर आपकी इच्छा हो तो जरूर पढ़ें। अगर आप मेरे इस लिंक पर क्लिक कर रहे हैं तो बहुत-बहुत धन्यवाद आपका।
अब रही बात कोरोना से आई महामंदी की, तो मैं आप सबसे यही कहना चाहूंगा के इंतजार करें, धैर्य रखें और अपनी क्षमताओं का विस्तार करते रहें, अपने हुनर की प्रैक्टिस बरकरार रखें। यह दुनिया वापस नॉर्मल होगी क्योंकि इंसान की इच्छा शक्ति जबरदस्त है। बिजली, आग, पानी, पहाड़, जंगल, बड़े-बड़े जंगली जानवर और बहुत सारे प्रकार के खतरों से जूझता और पार पाता हुआ, एक दूसरे का खून भी बहाता हुआ, लेकिन फिर भी अकेला ना रहने वाला इंसान इतनी आसानी से हारने वाला मुझे तो नहीं लगता। आप इतने निराश इसलिए हैं क्योंकि आप अभी तक अपने मां-बाप और गुरु की बनाई हुई दुनिया में सुरक्षित रहते आए है। और अब आपको लगता है की एक अजनबी दुनिया जहां पर गला काट स्पर्धा मची हुई है वहां पर आप टिक नहीं पाएंगे। ऐसा लगने में कुछ सच्चाई तो जरूर है लेकिन आप यह भी तो गौर कीजिए कि इसी दुनिया में डॉक्टर हैं, पुलिस है, फायर ब्रिगेड है, एनडीआरएफ है, एटीएस है, इंडियन आर्मी है, नेवी एयरफोर्स है। यह सब क्यों है? आपकी मेरी हिफाजत करने के लिए! यह दुनिया इतनी बुरी भी नहीं है जितना आप समझ रहे हो।
मास्क पहनिये, काम पर चलिए!
प्रवीण झा
सीनियर लेक्चरर
होटल प्रबंधन संस्थान, हाजीपुर
जिला वैशाली, बिहार
तिथि- जून 12, 20 20
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